भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों के घुसपैठ की खबरों का खंडन किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सेना ने लद्दाख में घुसपैठ नहीं की। चीनी सैनिक सिविल ड्रेस में थे और वो नागरिक वाहन से आकर डेमचोक में एलओसी पर अपनी सीमा में तैनात हो गए।
इससे पहले दावा किया गया था कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख में भारतीय सीमा में 6 किलोमीटर आकर चीनी झंडा लहराया। इस दौरान लद्दाख में स्थानीय धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन मना रहे थे। ख़बरों के मुताबिक चीनी सैनिकों ने डेमचॉक सेक्टर के क्योल गांव में हिमाकत बीती 6 जुलाई को की थी। खबरों में कहा गया था कि 11 चीनी सैनिक सिविल ड्रेस में थे। जिस वक्त घुसपैठ की गई उस वक्त तिब्बत के कुछ लोग दलाई लामा का जन्मदिन मना रहे थे और उनके हाथों में तिब्बत का झंडा था। जिसे देखकर वहां एसयूवी में सवार होकर पहुंचे चीन के सैनिकों का पारा चढ़ गया और वो इसका विरोध करने लगे।
मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया था कि जब ये सब कुछ हो रहा था तो उस वक्त वहां भारतीय जवान भी तैनात थे। जिनके आगे एक बार फिर चीनी सैनिकों ने सरेंडर कर दिया और कुछ देर रुकने के बाद वापस लौट गए। आपको बता दें कि साल 2016 में जून के महीने में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया था। चीनी सैनिकों ने डोकलाम में सड़क बनाने की कोशिश की थी। भारतीय जवानों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था। यह विवाद 73 दिनों तक चला था। इसके बाद चीन ने यहां सड़क निर्माण का काम रोक दिया था।
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