उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार को बंद कर दिए गए। शाम 5 बजकर 13 मिनट पर शीतकाल के लिए कपाच बंद किए गए। कपाट बंद होने के साथ ही चारधाम यात्रा का भी समापन हो गया।
बदरीश पंचायत से उद्धव जी और कुबेर जी की उत्सव मूर्ति योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर के लिए सोमवार को प्रस्थान करेगी। कपाट बंद करने की प्रक्रिया के तहत शनिवार को मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की थी। कपाट बंद होने से पहले माता लक्ष्मी को भगवान बदरीनाथ के मंदिर में विराजमान किया गया।
कपाट बंद करते समय 10 हजार तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में मौजूद थे। इस मौके पर कड़ाई भोग का आयोजन किया गया। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि रविवार को भगवान बदरीविशाल के कपाट दिनभर श्रद्धालुओं के लिए खुले रहे। मंदिर को गेंदे के फूलों से सजाया गया है।
बदरीनाथ धाम में माता मूर्ति मंदिर के कपाट भी रविवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। माता मूर्ति भगवान बदरीनाथ की माता हैं। ऐसी मान्यता है कि हर साल बामन द्वादशी के पर्व पर भगवान बदरीनाथ अपनी माता से मिलने उनके मंदिर में जाते हैं।
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