संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा से नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है। अब सिर्फ राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है। जिसके बाद ये कानून बन जाएगा।
नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर देश में रह रहे शरार्थियों में खुशी की लहर है। देश में अलग-अलग जगहों पर रह रहे शरणार्थी जश्न मना रहे हैं और इसके लिए मोदी सरकार की जय-जयकार कर रहे हैं। देवभूमि में भी बड़ी तादाद में शरणार्थी रहते हैं। इनमें से ज्यादातर वो हैं जो 1971 की लड़ाई के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से हैं। इन शरणार्थियों ने 48 साल बाद राहत की सांस ली है।
बिल पास होने के बाद ऊधमसिंह नगर के गदरपुर, शक्तिफार्म और दिनेशपुर में बसे शरणार्थी खुशी से झूम उठे हैं। वो इस बात से सबसे ज्यादा खुश हैं कि अब उनकी पहचान पूर्वी पकिस्तानी या पूर्वी बांग्लादेशी के बजाय हिंदुस्तानी के रूप में होगी। हालांकि में ये शराणार्थी अपने बुजुर्गों की ये ख्वाहिश पूरी नहीं होने पाने से थोड़े दुखी भी हैं। आपको बता दें कि कई शरणार्थी भारतीय कहलाने की आस में दुनिया छोड़कर चले गए।
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