उत्तराखंड: सांसद निशंक की बेटी का शानदार काम, अपने हाथों से बनाए मास्क कर्मचारियों को बांटे

उत्तराखंड समेत पूरे देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ जंग जारी है। इस जांग में हर कोई अपने-अपने तरीके से योगदान दे रहा है।

उत्तराखंड के पूर्व सीएम और देश के मौजूदा मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल की बेटी आरुषि निशंक ने कोरोना के खिलाफ जंग में अपना योगदान देकर सभी के सामने मिसाल पेश की है। आरुषि निशंक ने कोरोना वायरस की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन का सदुपयोग करते हुए घर में ही खादी के मास्क बनाए और उन्हें कर्मचारियों में बांट दिया। बेटी द्वारा मास्क बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि मुझे यह देखकर बेहद खुशी हुई कि मेरी बेटी आरुषि घर पर स्वयं खादी के मास्क बनाकर अपने स्टाफ के कर्मचारियों को बांट रही है और उनको कोरोना वायरस से बचने के लिए सजग भी कर रही है।

घर में मास्क बनाकर बांटने वाली आरुषि निशंक प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना, पर्यावरणविद्, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आरुषि ने गंगा नदी के धरती पर आने की कहानी पर आधारित ‘गंगा अवतरण’ एवं सूफियाना शास्त्रीय कथक नृत्य ‘सजदा’ जैसी रचनाओं की कोरियोग्राफी की है। आरुषि को उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार भी मिला है। आरुषि ने साल 2018 में अपनी पहली क्षेत्रीय फिल्म ‘मेजर निराला’ का निर्माण किया जो उनके पिता रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के लिखे उपन्यास पर आधारित है।

केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा सार्स-कोवि-2 कोरोना वायरस से जुड़ी एक नियमावली में कहा गया है कि देश की अगर 50 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो सिर्फ 50 प्रतिशत आबादी को ही कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। अगर 80 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो इस महामारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सकती है।

सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता का कहना है कि मास्क की कमी को देखते हुए इस नियमावली में घर पर मास्क बनाने पर जोर दिया गया है। ये पहल मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जो मास्क पहनना चाहते हैं, लेकिन उनके पास इन मास्क तक पहुंच नहीं है। ऐसे में घर पर बनाए हुए मास्क उपयोगी हो सकते हैं। इनकी खूबी यह है कि इन्हें धोकर दोबारा उपयोग किया जा सकता है।

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