कोरोना की वजह से विभिन्न गतिविधियां बंद होने से लोक कलाकारों के सामने भी आर्थिक संकट गहरा गया है।
सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के लोक कलाकारों ने गुरुवार को चौघानपाटा में प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की है कि संस्कृति विभाग उनके पूर्व के काम के एक साल का मानदेय रोका है जिसे जल्द जारी किया जाए, वरना कलाकार उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
कोरोना काल में विभिन्न प्रकार के मेले, सांस्कृतिक गतिविधियां बंद होने से लोक कलाकारों के सामने आर्थिक दिक्कतें बढ़ गई हैं। अल्मोड़ा में दर्जनों की संख्या में लोक कलाकारों ने इकठ्ठा होकर हुड़के की थाप लोकगीत गाकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि उन्हें पिछले 4 महीने से कोई काम नही मिला है। यही नहीं उत्तराखंड संस्कृति विभाग द्वारा उनके पूर्व के काम का एक साल के मानदेय का अभी तक भुगतान भी नही किया गया। जबकि कलाकारों के द्वारा इस बारे में कई बार संस्कृति मंत्री को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन उनकी अभी तक कोई सुध नही ली गई।
कुमाऊं लोक कलाकार संघ के महासचिव गोपाल चम्याल का कहना है कि आज कलाकारों के सामने भुखमरी की नौबत आ चुकी है। अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है वो उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
(अल्मोड़ा से हरीश भंडारी की रिपोर्ट)
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