उत्तराखंड में जनरल और ओबीसी वर्ग के सरकारी कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि जब तक बिना आरक्षण पदोन्नति बहाली का शासनादेश उन्हें नहीं मिल जाता तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, अल्मोड़ा में 40 विभागों के कर्मचारियों ने चौघानपाटा में जमा होकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी नहीं मान रही है, जिसको लेकर प्रदेशभर के जनरल, ओबीसी कर्मचारी कार्य वहिष्कार पर चले गए हैं।
उत्तराखंड जनरल-ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है और इस पर प्रदेश सरकार को फैसला लेना है। बावजूद इसके सरकार इतना सोच-विचार क्यों कर रही है।
वहीं, सरकार का पूरे मामले में कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए बातचीत की जा रही है। हड़ताल किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। तीन मार्च से बजट सत्र शुरू हो रहा है। ये प्रदेश के विकास से जुड़ा मसला है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा है कि मैं आशा करता हूं कि कर्मचारी हड़ताल के फैसले पर दोबारा विचार करेंगे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एससी/एसटी के लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारें बाध्य नहीं हैं, क्योंकि यह मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा कि एससी/एसटी के लोग सरकारी नौकरियों में आरक्षण का दावा नहीं कर सकते, ये राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर करता है। कोर्ट के इस फैसले का पूरे देश में विरोध हो रहा है।
(हरीश भंडारी की रिपोर्ट)
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