घर से बाहर निकलते समय ‘सवाये’ का रखें खास ध्यान, मिलेगी सफलता! जानें क्या है ये

कोरोना वायरस से पूरा देश हलकान है। हर कोई इससे बचने का उपाय ढूंढ रहा है। कहते हैं कि हमारे जो बड़े बुजुर्ग होते हैं वो मुश्किल दौर में बेहद काम आते हैं।

हमेशा बड़े बुजुर्गों के कहे अनुसार काम करना लाभदायक होता है। आज भी हम मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में आइए बड़े बुजुर्गों द्वारा शुरू की गई एक परंपरा को समझते हैं और इससे फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। क्या आप सवाये के बारे में जानते हैं? अगर आप नहीं जानते हैं तो आज जान लीजिए। बचपन में आपने सुना और देखा होगा कि आपके माता-पिता और बड़े बुजुर्ग सवा रुपये, सवा पांच रुपये, सवा ग्यारह रुपये का प्रसाद चढ़ाते थे। उस समय आपके मन में यह ख्याल नहीं आया कि आखिर सवा रुपये, सवा पांच रुपये, सवा ग्यारह रुपये का प्रसाद ही क्यों? इसकी जगह राउंड फीगर में एक रुपया, पांच रुपया और ग्यारह रुपया भी हो सकता था, लेकिन नहीं, हमारे बड़े बुजुर्ग ‘सवा’ का विशेष ध्यान रखते थे। ऐसा नहीं कि वो लोग आजकल ऐसा नहीं करते हैं। वो लोग आजकल भी ऐसा ही करते हैं।

आजकल आप देखते होंगे कि यदि घर में बहन या बेटी के रिश्ते की बात करने के लिए हमारे बड़े बुजुर्ग घर से निकलते समय भी इस सवाये का खास ध्यान रखते हैं। हमारे बुजुर्ग ऐसे शुभ कामों के लिए घर से सवा दस बजे, सवा ग्यारह बजे इस तरह का ही समय चुनते हैं। आप गौर से ध्यान देना कि हमारे बड़े बुजुर्ग कभी भी ऐसा समय नहीं चुनते जैसे पौने दस बजे, पौने ग्यारह बजे, पौने बारह बजे।

अब आप इतने में तो कुछ हद तक समझ गए होंगे कि सवाये का मतलब क्या है। अब अगर आपको भी कोई शुभ शगुन का काम करना तो आज से आप भी सवाये का ध्यान रखें। आप अपने घर से निकलते समय ऐसा समय ही चुनें जैसे कि सवा सात बजे, सवा आठ बजे, सवा दस बजे, सवा ग्यारह बजे।

अगर हो सके तो एक काम और करें। जब भी सवाये का ध्यान रखकर आप अपने घर से बाहर निकलें तो तुलसी की पत्ती अपने मुंह में रखकर निकले। अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं हो तो आप हरि दूब भी अपनी जेब में रखकर निकल सकते हैं। आपके घर में कन्या के रूप में अगर बेटी या छोटी बहन तो आप उसे शगुन के बतौर कुछ रुपये दे सकते हैं। ऐसा करना आपके लिए सोने पर सुहागा होगा। सवाये के साथ-साथ आपको कन्या रूपी देवी का आशीर्वाद भी मिलेगा।

(न्यूज़ नुक्कड़ के लिए दिनेश शर्मा की रिपोर्ट)

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