सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर रोक लगाने के साथ किया कमेटी का गठन, जानें किसानों ने कोर्ट फैसले पर क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश रोक लगा दी है। साथ ही एक समिति गठित करने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रमासुब्रमण्यम की खंडपीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद कहा, “हम अगले आदेश तक तीनों कृषि सुधार कानूनों को निलंबित करने जा रहे हैं। हम एक समिति भी गठित करेंगे।”

शीर्ष अदालत ने कहा, “हम समिति में भरोसा करते हैं और इसे गठित करने जा रहे हैं। यह समिति न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा होगी।”

कोर्ट ने समिति के लिए कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, हरसिमरत मान, प्रमोद जोशी और अनिल घनवंत के नाम का प्रस्ताव भी किया है। हालांकि, न्यायालय पूर्ण आदेश आज शाम तक जारी करेगा।

उधर, किसानों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत तो किया है, लेकिन ये भी साफ कर दिया है कि वो सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, हमारा विरोध जारी रहेगा। हम मांग कर रहे हैं कि सरकार तीनों कानूनों को निरस्त करे और हमारी उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) गारंटी के लिए एक कानून भी बनाए।

उन्होंने ये भी कहा कि किसानों का विरोध जारी रहेगा, चाहे जितने दिन लगें। टिकैत ने यह भी कहा कि वह दूसरे किसान नेताओं के साथ तीन कृषि कानूनों को होल्ड पर रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा करेंगे।

ये पूछे जाने पर कि क्या किसान शीर्ष न्यायालय द्वारा गठित पैनल में भाग लेंगे, इस पर टिकैत ने कहा, हम किसानों की मुख्य समिति में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और हम 15 जनवरी को होने वाली सरकार के साथ बैठक के लिए भी जाएंगे।

26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने की योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, गणतंत्र दिवस की परेड योजना के अनुसार होगी।

टिकैत की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के तुरंत बाद सामने आई है। शीर्ष अदालत ने एक समिति बनाने को कहा है, जिसमें ज्यादातर किसान शामिल होंगे, जो कानूनों के खिलाफ किसान यूनियनों की शिकायतों को सुनेंगे।

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