बुलंदशहर हिंसा और दारोगा सुबोध कुमार सिंह की हत्या मामले में गिरफ्तार किए गए फौजी जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जीतू पर सुबोध सिंह की हत्या का आरोप है। पुलिस उसे रविवार को घटना स्थल स्याना लेकर पहुंची थी। वहीं जीतू ने कहा, “मैंने इंस्पेक्टर को गोली नहीं मारी, मैं निर्दोष हूं।” आरोपी सोपोर में 22 राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात था। जहां से सेना ने रविवार रात को 12.30 बजे उसे यूपी एसटीएफ को सौंपा था। इससे पहले मेरठ और नोएडा एसटीएफ की टीम ने शनिवार देर रात तक फौजी से पूछताछ की थी।
जीतू का भाई धर्मेद्र फौजी उससे मिलने बुलंदशहर पुलिस लाइन में क्राइम ब्रांच दफ्तर पहुंचा लेकिन पुलिस ने धर्मेद्र को जीतू से मिलने की इजाजत नहीं दी।
गौरतलब है कि अवैध बूचड़खानों के विरोध में बुलंदशहर के चिंगरावठी इलाके में पिछले सोमवार को हिंसक प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकी में आगजनी और तोड़फोड़ की थी। सड़क पर भी कई वाहन फूंक दिए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया था। इस दौरान पुलिस को बचाव में हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। प्रदर्शनकारियों की ओर से चली गोली में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी।
बुलंदशहर हिंसा को करीब एक हफ्ता हो चुका है, बावजूद पुलिस अब तक यह दावे के साथ ये नहीं कह पाई है कि उसने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है। जीतू का साफ कहना है कि उसने इस्पेक्टर को गोली नहीं मारी थी। ऐसे में सवाल ये है कि अगर जीतू फौजी ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को गोली नहीं मारी तो किसने मारी।
उधर, इस्पेक्टर सुबोध की पत्नी अपने पति के लिए इंसाफ की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि जबतक उनके पति का कातिल मारा नहीं जाता उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा।
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