चारधाम और कांवड़ यात्रा के बाद अब हरिद्वार महाकुंभ के आयोजन पर कोरोना का साया मंडराने लगा है।
अगर कोरोना का प्रकोप इसी तरह रहा तो हरिद्वार माकुंभ को आयोजित करना काफी मुश्किल हो जाएगा। हरिद्वार महाकुंभ आयोजित किया जाएगा या फिर इसे रोक दिया जाएगा। फिलहाल इस पर फैसला लिया जाना बाकी है। इस सबंध में राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान आया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, “अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ चर्चा के बाद महाकुंभ आयोजित करने पर फैसला लिया जाएगा। ये निकाय अंतिम निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। फरवरी, 2021 तक कोरोना का प्रकोप कैसा रहेगा इसे भी ध्यान में रखा जाएगा।”
इससे पहले सीएम त्रिवेंद्र रावत ने जून में संकेत दिए थे कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कुंभ का आयोजन प्रतीकात्मक रूप से होगा। उन्होंने कहा था कि मेले का आयोजन सीमित ढंग से होगा।
11 मार्च, 2021 को पहला शाही स्नान होना है। खबरों के मुताबिक, फरवरी, 2021 में कोरोना महामारी और कुंभ के आयोजन को लेकर समीक्षा बैठक होगी। इस बैठक में सरकार परिस्थितियों की समीक्षा करेगी। कहा ये भी जा रहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो सभी 13 अखाड़ों के 3-3 प्रतिनिधि संत ही प्रतीकात्मक रूप से गंगा स्नान करेंगे।
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