केदारनाथ में आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि के पुनर्निर्माण मामले में सरकार को अवमानना नोटिस जारी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केदारनाथ में आदि गुर शंकराचार्य की समाधि के पुनर्निर्माण के मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने को लेकर सरकार को अवमानना नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि दो हफ्ते के अंदर जवाब पेश करें कि क्यों न अवमानना की कार्यवाही अमल में लायी जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की युगलपीठ ने दिल्ली निवासी अजय गौतम की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद बुधवार को ये नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि दो सदस्यीय खंडपीठ ने दो साल पहले 10 अक्टूबर, 2018 को अपने महत्वपूर्ण आदेश में सरकार को निर्देश दिये था कि केदारनाथ आपदा में क्षतिग्रस्त आदि गुरू शंकराचार्य जी की समाधि का पुनर्निर्माण एक साल के अंदर करें और संबद्ध जिलाधिकारी को निर्देशित किया था कि वह सुनिश्चित करें कि समाधि में स्थानीय पहाड़ी शिल्प का समावेश हो।
याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया कि केदारनाथ आपदा को आये हुए लगभग साढ़े सात साल बीत गये हैं और अदालत के आदेश को भी दो साल पूरे हो गये हैं लेकिन सरकार की ओर से आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण नहीं कराया गया है।
सरकार इस मामले में उदासीन बनी हुई है। इसके बाद अदालत ने इस प्रकरण में सरकार का पक्ष जानना चाहा लेकिन उसके पास कोई जवाब नहीं था। इस मामले की व्यक्तिगत रूप से पैरवी कर रहे गौतम ने बताया कि अदालत ने सरकार के रवैये को गंभीरता से लेते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है और कहा है कि दो सप्ताह के अंदर जवाब दें कि क्यों ने अवमानना की कार्यवाही अमल में लायी जाए।
गौतम की ओर से वर्ष 2018 में हाईकोर्ट को एक प्रार्थना पत्र लिखकर कहा गया कि केदारनाथ आपदा में आदि गुरू शंकराचार्य की समाधि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। सरकार को इसके निर्माण और मरम्मत के लिये आदेश जारी करें। इसके बाद अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सरकार को एक साल में समाधि के पुनर्निर्माण के आदेश जारी किए थे।