CAA को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में अदालत से केंद्र सरकार को फौरी राहत मिल गई है। अदालत ने फिलहाल इस कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
साथ ही सरकार से चार हफ्तों में पूरे मसले को लेकर जवाब मांगा है। सबसे बड़ी अदालत ने असम, पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश से जुड़ी याचिकाओं के लिए अलग कैटेगरी बना दी है। सुप्रीम कोर्ट से इस कानून पर तुरंत रोक लगाने की भी मांग की गई। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि इस पर सिर्फ संवैधानिक पीठ ही फैसला ले सकती है, जो पांच जजों की होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने ये इशारा भी दिया है कि सभी याचिकाओं को सुनने के लिए संविधान पीठ का गठन किया जा सकता है। अदालत से ये भी अपील की गई कि कोई भी हाईकोर्ट नागरिकता संशोधन एक्ट पर सुनवाई ना करे। इस पर अदालत ने किसी भी निचली अदालत को मसले पर सुनवाई नहीं करने का आदेश दिया।
शाहीन बाग की औरतों ने क्या कहा?
नागरिकता कानून के विरोध में धरने पर बैठी शाहीन बाग की औरतों ने प्रदर्शन खत्म करने से इनकार कर दिया है। यहां 15 दिसंबर सड़क पर धरने पर बैठी औरतों ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का इस पर फैसला नहीं आ जाता तब तो वो यहां से नहीं उठेंगी।
आपको बता दें कि शाहीन बाग की ही तर्ज पर अब मुल्क के दूसरे हिस्सों में भी महिलाएं नागरिकता कानून के विरोध में धरना दे रही हैं। लखनऊ के घंटाघर पर भी औरतें 5 दिनों से धरने पर बैठी हैं। यहां कई प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।

