महाराष्ट्र: मोदी है तो मुमकिन है! दो राजनीतिक घटनाक्रम और दो सियासी बयान जो खोल देंगी आपकी आंखें!

महाराष्ट्र में NCP नेता अजित पवार के समर्थन से बीजेपी ने सरकार बना ली है। इस पूरे घटनाग्रम को लोग अपने-अपने नजरिये से देख रहे हैं।

बीजेपी द्वारा सरकार बनाने को कोई अनैतिक बता रहा है तो कोई पीएम मोदी की तारीफ कर रहा है। कुछ लोग बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को चाणाक्य बताकर उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। राज्या में शह और मात का खेल शुरू हो गया है। विधानसभा में बहुमत परीक्षण से पहले सभी पार्टियां राजनीति की बिसात पर अपनी-अनपी चाल चलनी शुरू कर दी है।

इस लेख में हम दो राजनीतिक बयान और देश के दो सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करेंगे। इन दोनों बयानों और राजनीतिक घटनाक्रमों से आप खुद इस बात का अंदाजा लगाएं कि आखिर इस देश की राजनीति में 2014 के बाद से क्या हो रहा है?

सबसे पहले बात सबसे बड़े राजनीतिक बयान की करते हैं। महाराष्ट्र में सुबह सवेरे दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेने के बाद देवेंद्र फडणवीस दोपहर होते-होते मुंबई में बीजेपी दफ्तर पहुंचे। यहां पर फडणवीस का बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मोदी है तो मुमकिन है! इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि हम महाराष्ट्र को एक मजबूत सरकार देंगे। कहते हैं कि राजनीति में हर बयान का मतलब होता है। जाहिर है फडणवीस का ये कहना कि मोदी है तो मुमकिन है! इस बयान के भी कई मतलब निकाले जा सकते हैं। इसका मतलब जनता निकाले तो ज्यादा बेहतर है।

फडणवीस के बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने जनता को साफ-साफ शब्दों में ये समझाया का राजनीति में हर बयान का मतलब होता है, कुछ भी यूं ही नहीं कह दिया जाता। महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनने पर गडकरी ने कहा कि मैंने तो पहले ही कह दिया था कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी मुमिकन है। उन्होंने कहा कि मैंने जो बयान दिया था उसका मतलब अब आप निकाल सकते हैं। महाराष्ट्र में सरकार बनाने पर गडकरी ने जो बयान दिया है उसके कई मतलब निकाले जा सकते हैं। ये मतलब जनता निकाले तो ही अच्छा है।

अब बात देश के दो सबसे बड़े राजनीति घटनाक्रमों की। सबसे पहले बात करते हैं मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम की जो महाराष्ट्र में घटी है। शुक्रवार शाम तक ये खबर थी कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन गई है। तस्वीर साफ हो गई थी कि महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सरकार बनाने जा रही हैं।

जिस अजित पवार के समर्थन से बीजेपी ने राज्य में सरकार बनाया है उनका मोबाइल नंबर रात 9 बजे के बाद बंद हो गया। खेल आधी रात को शुरू हुआ। ध्यान रहे कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू था। इस बीच रात 9 बजे की फ्लाइट से बीजेपी महासचिव भूपेंद्र यादव दिल्ली से मुंबई पहुंचे।

अजित पवार ने रात करीब 1 बजे NCP विधायक दल के नेता के तौर पर विधायकों की बैठक ली। रात करीब 2 बजे विधायकों के समर्थन की चिट्‌ठी लेकर राज्यपाल के पास गए। इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने का मेल राष्ट्रपति को भेजा। जब पूरा देश सो रहा था उस वक्त सियासत के धुरंधर जाग रहे थे। रात 2 बजे से 5 बजे के बीच प्रधानमंत्री की ओर से सहमति का पत्र राष्ट्रपति को मिला और करीब पौने 6 बजे राष्ट्रपति ने महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश जारी कर दिया। जब तक हमारी और आपकी नींद खुली तब तक देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार राजभवन में शपथ ले चुके थे। यानी आधी रात को शुरू हुआ खेल सूर्य देव के दर्शन देते-देते अंजाम तक पहुंच गया। पूरी रात दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक, राष्ट्रपति से लेकर पीएम तक और पीएम से लेकर राज्यपाल तक इसलिए जागे ताकि महाराष्ट्र में सरकार का गठन हो सके।

अब बात दूसरे और आखिर घटनाक्रम की। हालांकि इस घटनाक्रम का कोई महाराष्ट्र से सीधा रिश्ता नहीं है, लेकिन इससे जनाना और समझना बेहद जरूरी है, ताकि आप नतीजे तक पहुंच सकें। आपको याद होगा कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की सरकार गिरने के बाद नवंबर 2018 में क्या हुआ था। ये घटनाक्रम भी रात को ही घटा था, लेकिन नतीजा महाराष्ट्र जैसा नहीं निकला था। 21 नवंबर, 2018 की रात को पीडीपी प्रमुख मुफ्ती महबूबा ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने पहले समर्थन पत्र को राजभवन में फैक्स किया। लेकिन उनका फैक्स राजभवन नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने ट्वीटर के जरिए समर्थन पत्र को राज्यपाल को टैग कर ये बताया कि वो राज्य में सरकार बनाना चाहती हैं। लेकिन राजभवन से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। राज्यपाल की फैक्स मशीन और फोन दोनों ही काम नहीं कर रहे थे। महबूबा द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ ही देर बाद जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को भंग कर दिया गया। उस समय सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे।

राजभवन से विधानसभा भंग करने का आदेश जारी होने के कुछ मिनट बाद ही उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, “नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले 5 महीने से विधानसभा भंग करने की मांग कर रही है। ये कोई संयोग नहीं हो सकता कि मुफ्ती के सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ मिनट बाद ही विधानसभा भंग करने का आदेश जारी किया गया।”

देश की इन दो राजनीतिक घटनाक्रमों और दो सियासी बयानों से आप खुद अंदाजा लगाइए कि मौजूदा राजनीति में क्या हो रहा है। हकीकत क्या है और फसाना क्या है?

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