मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के बाद क्या होगा?

मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से UNSC में पास हो जाता है तो सबसे पहले उसके सारे अकाउंट तुरंत सीज कर दिए जाएंगे।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद ये बात फिर से जोर पकड़ने लगी है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया जाए। 13 मार्च को युनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बठक में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पास भी हो सकता है। भारत लंबे वक्त से मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने की मांग कर रहा है। पिछले साल भी UNSC में इंडिया ने मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की मांग की थी, लेकिन चीन ने इसमें अड़ंगा लगा दिया। बता दें कि अब तक तीन बार इस प्रस्ताव पर चीन वीटो लगा चुका है। चूंकि चीन UNSC का स्थायी सदस्य है जबकि पिछली बार भारत अस्थायी सदस्य था, लिहाजा चीन के वीटो लगाने के बाद पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड को ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं किया जा सका था।

इस बार पीएम मोदी की बेहतर कूटनीति की वजह से अमेरिका,फ्रांस, ब्रिटेन पहले ही मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का समर्थन कर चुके है। फ्रांस आगामी UNSC की बैठक में प्रस्ताव भी पेश करेगा। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन भी ना-नुकुर करते-करते राजी हो ही गया है कि मसूद अजहर को वर्ल्ड टेररिस्ट की लिस्ट में शामिल होने से रोकने के लिए वीटो नहीं लगाएगा। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आतंक के इस सरगना को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के बाद आखिर होगा क्या?

ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने के बाद क्या होगा?
अगर मसूद अजहर के ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से UNSC में पास हो जाता है तो सबसे पहले उसके सारे अकाउंट तुरंत सीज कर दिए जाएंगे। आतंकी मसूद की सारी संपत्ति फौरन जब्त कर ली जाएगी और वह पाकिस्तान से बाहर जाते ही गिरफ्तार हो जाएगा। यही नहीं खुद उसे पनाह देने वाले पाकिस्तान पर भी उसे गिरफ्तार करने का दबाव बनेगा। मतलब मसूद अजहर का भी वही हाल होगा, जो बैन लगाये गये दूसरे संगठनों का हुआ है।

कौन सा आतंकी संगठन ग्लोबल टेररिस्ट लिस्ट में शामिल?
अल कायदा ग्लोबल टेररिस्ट लिस्ट में शामिल है, लेकिन उसका आका ओसामा-बिन-लादेन पाकिस्तान में मारा जा चुका है। अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर 9/11 हमले के मास्टरमाइंड को मारा था। तालिबान ग्लोबल टेरेरिस्ट लिस्ट में है लेकिन उसका आका मुल्ला उमर खत्म हो चुका है। आतंकी संगठन ISIS भी इसी कैटेगरी में है और सक्रिय है, लेकिन उसका मुखिया अबु बकर बगदादी मारा जा चुका है। ऐसे में मसूद अजहर जैसे ही ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होगा, पाकिस्तान उसे खुलेआम अपने यहां पनाह नहीं दे पाएगा।

आतंकवाद पर पाकिस्तान की कथनी और करनी में फर्क?
आतंकी संगठन को मदद करने के आरोप में पाकिस्तान पहले ही ‘FATA’ (Financial action task force) की ग्रे लिस्ट में डाला चुका है। इसी साल सितंबर की बैठक में ब्लैकलिस्ट में डाले जाने का खतरा है। इसी बीच पाकिस्तान के अखबार डॉन ने एक रिपोर्ट छापी है जिसके मुताबिक वहां 2018 में 8,707 संदेहास्पद लेन-देन हुए हैं। इन लेन-देन का लिंक आतंकी संगठनों से जुड़ रहे हैं। 2017 के मुकाबले 2018 में आतंकी संगठनों की फंडिंग में 57 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। पाकिस्तान में आतंकी संगठन अलकायदा, जमात-उद-दुआ, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क के आतंकी संगठन सक्रिय हैं।

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