हरिद्वार में कांवड़ यात्रा प्रतिबंधित होने के बावजूद भी गंगाजल लेने के लिए यात्रियों का आना लगातार जारी है। आज सुबह 100 से अधिक कांवड़ लेने के लिए आए लोगों और अन्य यात्रियों को वापस लौटाया गया।

बता दें कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए उत्तराखंड पहले ही कावंड यात्रा स्थगित कर चुकी है। इन यात्रियों को जीआरपी ने शटल बसों और वापसी की ट्रेनों से टिकट कराने के बाद वापस भेजा। रेलवे स्टेशन के निकास द्वार पर तैनात की गई पुलिस टीमें यात्रियों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट देखने के बाद ही उन्हें स्टेशन से बाहर भेज रही हैं। जिन यात्रियों के पास रिपोर्ट नहीं है। उनकी जांच भी करवाई जा रही है।

वहीं जो यात्री जांच करवाने के इनकार कर रहे हैं। उनकों वापस भेजा जा रहा है। कांवड़ियों की पहचान ग्रुप के माध्यम से कराई जा रही है। कांवड़ लेने के लिए युवा ग्रुपों में आते हैं, ऐसे में जिस भी ग्रुप में चार से पांच युवा दिख रहे हैं। उनसे भी पूछताछ की जा रही है।

इसके साथ ही देहरादून, ऋषिकेश से आने वाले यात्रियों की स्थानीय आईडी देखकर स्टेशन परिसर से बाहर जाने दिया जा रहा है। एएसपी जीआरपी मनोज कात्याल ने बताया कि स्टेशन के सभी निकास द्वारों पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई है।

बीते एक सप्ताह में पुलिस 3635 कांवड़ियों को हरिद्वार के विभिन्न स्थानों से वापस कर चुकी है। डीआईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि इस बार कांवड़ मेला प्रतिबंधित होने के बावजूद कांवड़िए हरिद्वार आने का प्रयास कर रहे हैं। सड़क और ट्रेन से हरिद्वार पहुंच रहे कांवड़ यात्रियों को जिले की सीमा से ही शटल बस और ट्रेनों में बैठाकर वापस भेजा जा रहा है।

हरिद्वार पुलिस ने नारसन, भगवानपुर और खानपुर बॉर्डर से 1174 दुपहिया वाहन, 3473 छोटे वाहन और 136 बड़े वाहनों सहित कुल 3635 कांवड़ियों को वापस भेजा। इसके साथ ही ट्रेनों से आए कुल 316 कांवड़ यात्रियों को शटल बस और ट्रेनों के माध्यम से वापस उनके गन्तव्यों को भेजा गया। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।

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