महाराष्ट्र में सीएम पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच रानजीतिक दंगल जारी है। शिवसेना 50-50 के फॉर्मूले पर अड़ी है और कह रही है ढाई-ढाई साल दोनों ही पार्टियों का सीएम होना चाहिए।
शिवसेना बीजेपी को गठबंधन धर्म भी याद दिला रही है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि दोनों ही पार्टियों की कैबिनेट में बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी के समर्थन पर उन्होंने कहा कि राजनीति में हमेशा विकल्प खुले रहते हैं।
NCP के समर्थन की खबरों पर संजय राउत ने कहा कि अभी इस पर विचार नहीं किया है। इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि उन्होंने ये जरूर कहा कि राजनीति में सब कुछ संभव है। राउत ने कहा कि हम सभी राम में विश्वास रखते हैं तो राम की तरह प्राण जाए पर वचन ना जाए की नीति अपनानी चाहिए। इस बीच सोमवार को देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के नेता अलग-अलग राजभवन राज्यपाल से मिलने पहुंचे। हालांकि दोनों ने इसे सिर्फ दिवाली पर सामान्य मुलाकात बताया।
बिना बीजेपी कैसे बनेगी सरकार?
288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी के पास 105 सीटें हैं जबकि शिवसेना के 56 विधायक हैं। दोनों पार्टियों के विधायकों को मिलाकर कुल 161 सीटें हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में दोनों पार्टी मिलकर आसानी से सरकार बना लेंगी। अब अगर बीजेपी और शिवसेना में यूं ही खींचतान मची रही और शिवसेना को कांग्रेस और एनसीपी ने समर्थन दे दिया और उसने भी समर्थन स्वीकार किया, तब दोनों ही पार्टियों के समर्थन से शिवसेना सरकार बना लेगी। शिवसेना के पास 56 सीटें हैं, जबकि एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। तीनों को मिलाकर 154 विधायक हो जाते हैं, जबिक सरकार बनाने के लिए 145 विधायक चाहिए।
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