उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत अब इस दुनिया में नहीं रहे। प्रकाश में वो खूबियां थीं जिसकी झलक शायद ही आज किसी राजनेता में नजर आती हो।
वो भले ही इस दुनिया में ना हो, लेकिन उन्होंने अपने काम से जो पहचान बनाई है इससे वो हमेशा लोगों को दिलों पर राज करेंगे। क्या आपको पता है उन्होंने अपने आखिरी बजट भाषण में जो पक्तियां लिखी थी जो अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। वो इसे पढ़ नहीं सके। भाषण के दौरान पढ़ने के लिए उन्होंने लिखा था, ”सूर्य हूं मैं हर एक पल जला हूं सदा, चांद बन रात में भी चला हूं सदा, हार के टूटने का मैं आदी नहीं, मैं कमल कीच में भी खिला हूं सदा।”
प्रकाश पंत की ये पंक्तिया अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई हैं। सदन में जब वो आधे भाषण तक पहुंचे थे तभी उनके पांव लड़खड़ाने लगे थे। इसके बाद उन्हें भाषण बीच में छोड़ना पड़ा था, लेकिन बजट भाषण के लिए उन्होंने जो चार पंक्तियां लिखी वो उनके व्यक्तित्व का आइना बन गई। मिडिल क्लास परिवार में जन्में पंत फार्मासिस्ट से राजनीति में आए और अपनी काबलियत के दम पर संसदीय, विधायकी और वित्त सरीखे मंत्रालय के मंत्री बनें। वो हमेशा सरकार के लिए ढाल बन कर खड़े हुए। मुस्कराहट उनका सबसे प्रमुख हथियार था। प्रदेश की सरकार, राजनीतिक दल, उनके नेता, कर्मचारी और प्रदेश की जनता के लिए पंत वीआईपी कल्चर से जुदा एक सज्जन पुरुष थे। वो अब भले से हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन हमारे दिलों में हमेशा रहेंगे।
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