उत्तराखंड: उधम सिंह नगर को किस वजह से कहा जाता है ‘मिनी हिंदुस्तान’?, पढ़ लीजिये

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर प्रदेश के तेजी से प्रगति कर रहे जिलों में से एक है।

इसकी भौगोलिक बनावट और दूसरी वजहों से इसे लोग मिनी हिंदुस्तान भी कहते हैं। 1995 में नैनीताल से अलग होकर बना ये जिला आधुनिक कृषि, शिक्षा और इंडस्ट्री के केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। रुद्रपुर जिले का मुख्यालय है। कभी ये जिला दलदली जमीन, कई महीनों की बारिश, जंगली जानवरों और परिवहन के साधन के अभाव में उपेक्षित था, लेकिन सरकार और जनता की कोशिशों से इस जिले ने बहुत तेजी से तरक्की की और अब उधम सिंह नगर कुमाऊं पहाड़ियों के लिए गेटवे (Gateway to Kumaon Hills) है।

क्या है उधम सिंह नगर का इतिहास?
इतिहासकारों के मुताबिक रुद्रपुर गांव को भगवान रूद्र के एक भक्त या रुद्र नाम के हिंदू आदिवासी प्रमुख ने स्थापित किया था। बताया जाता है कि मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल के दौरान 1588 में इस जमीन को राजा रुद्र चंद्र को सौंप दिया गया था। रुद्रपुर नए रंगों और मानव गतिविधियों से भरा हुआ रहा है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान नैनीताल को एक जिला बनाया गया। 1864-65 में पूरे तराई और भावर को तराई और भावर सरकारी अधिनियम के तहत रखा गया, जिसे ब्रिटिश मुकुट द्वारा सीधे नियंत्रित किया गया था।

करीब 2542 वर्ग किलोमीटर में फैले उधम सिंह नगर जिले में 687 गांव हैं। यहां की जनसंख्या 16 लाख से ज्यादा है। जिले में सात ब्‍लॉक और आठ तहसील हैं। खास बात ये है कि यहां साल भर टूरिस्ट सीजन रहता है। उधम सिंह नगर जिला तो बहुत बाद में बना लेकिन यहा का विकास आजादी के बाद 1948 से शुरू हो गया था, जब विभाजन के वक्त शरणार्थी समस्या सामने आई थी। उत्तर-पश्चिम और पूर्वी क्षेत्रों के अप्रवासी को उपनिवेश योजना के तहत 164.2 वर्ग किमी भूमि क्षेत्र में दोबारा स्थापित किया गया था।
इस जिले में करीब-करीब हर प्रदेश कश्मीर, पंजाब, केरल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गढ़वाल, कुमाऊं, बंगाल, हरियाणा,राजस्थान, नेपाल और दक्षिण भारत के लोग रहते हैं। इसके साथ ही कई धर्मों और व्यवसायों के लोगों के साथ विविधता में एकता का उदाहरण है। इसी वजह से इसे मिनी हिंदुस्तान कहा जाता है।

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