सावधान! ग्लेशियर फटने से मची तबाही के बाद चमोली के लिए ये है सबसे बड़ा खतरा! पढ़िए
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने के बाद बाढ़ की वजह से झील बनने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है।
उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने के बाद बाढ़ की वजह से झील बनने के बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है।
उत्तराखंड में श्रृषिगंगा के पास आपदा ग्रस्त क्षेत्र से अभी तक 62 शव बरामद किए गए हैं।
चमोली जिले में हाल ही में ग्लेशियर फटने से मची तबाही और बाढ़ के बाद मुरेन्डा इलाके में एक प्राकृतिक झील बन गई है।
चमोली में त्रासदी के बाद प्रभावित इलाकों में लापता लोगों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
एनटीपीसी लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि उसकी 520 मेगावॉट की तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना से 7 फरवरी को होने वाले नुकसान का आकलन करना अभी बाकी है।
देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जिले में 7 फरवरी को आई त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है।
चमोली त्रासदी के बाद कई घरों के चिराग बुझ गए। अभी भी कई लोग लापता हैं। लापता लोगों के परिजन अपनों की राह देख रहे हैं।
उत्तराखंड के चमोली जिले में 7 फरवरी को ग्लेशियर के कारण आयी प्राकृतिक आपदा के कारण ऋषिगंगा और धौली गंगा में उफान आ गया था।
उत्तराखंड में जोशीमठ के पास ग्लेशियर फटने से आए सैलाब के बाद अब तक 31 शव बरामद किए जा चुके हैं।
रविवार को चमोली जिले के रैनी गांव में ग्लेशियर टूटने के बाद पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आया है। जिससे तबाही मच गई।