दिल्ली की सड़कों पर महिलाओं का हक़: 'रिक्लेम द नाइट' वॉक में उमड़े नागरिकदिल्ली: 'रिक्लेम द नाइट' वॉक में उमड़े नागरिक
  • 9 अक्टूबर की रात लोधी गार्डन से इंडिया गेट तक निकली ‘रिक्लेम द नाइट’ पदयात्रा
  • राजलक्ष्मी, यशिका और ऋचा ने की पहल, बदायूं सांसद आदित्य यादव भी हुए शामिल
  • संदेश: सुरक्षा और आज़ादी साथ-साथ चलें, सार्वजनिक स्थान सबके लिए हों
  • आयोजकों की घोषणा: अब हर महीने होगी ऐसी वॉक

रात के अंधेरे में जब ज़्यादातर महिलाएँ घर लौटने की जल्दी में होती हैं, तब राजधानी की सड़कों पर एक अलग नज़ारा दिखा। शुक्रवार रात दिल्ली के लोधी गार्डन से शुरू हुई एक पदयात्रा ने इंडिया गेट पहुँचकर एक सीधा सवाल उठाया: क्या शहर की रातें सबकी नहीं हैं?

‘रिक्लेम द नाइट’ नाम की इस वॉक की शुरुआत राजलक्ष्मी, यशिका और ऋचा ने की। तीनों का मानना है कि हर महिला को दिन के किसी भी पहर में बेझिझक और आत्मविश्वास के साथ सार्वजनिक जगहों पर आने-जाने का अधिकार है। इस सोच से सहमत बड़ी संख्या में महिलाएँ और उनके समर्थक इस पैदल मार्च में जुटे और लोधी गार्डन की हरियाली से इंडिया गेट की खुली सड़कों तक साथ चले।

डर नहीं, भरोसे की संस्कृति

आयोजकों के मुताबिक यह आयोजन किसी एक रात का प्रदर्शन भर नहीं है। इसका मक़सद ऐसा माहौल बनाना है जिसमें महिलाएँ बिना किसी डर के घर से निकलें, सड़कों पर चलें और सार्वजनिक जीवन में अपनी भागीदारी निभाएँ। उनका कहना है कि सुरक्षा और आज़ादी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ चलने वाली चीज़ें हैं। जब तक सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आवाजाही सीमित की जाती रहेगी, तब तक असली सुरक्षा अधूरी रहेगी।

पदयात्रा में शामिल लोगों ने महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों के अनुभवों पर खुलकर बात करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। रात में अकेले निकलने पर होने वाली हिचक, अनकही आशंकाएँ और रोज़मर्रा की सावधानियाँ अक्सर चर्चा से बाहर रह जाती हैं। इस वॉक ने इन अनुभवों को सामने रखने का मंच दिया।

साझा ज़िम्मेदारी का सवाल

आयोजकों ने साफ़ कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल महिलाओं की चिंता नहीं है। यह पूरे समाज की साझा ज़िम्मेदारी है। इसी वजह से पुरुषों और अन्य समर्थकों को भी इस मुहिम का हिस्सा बनाया गया। उनका तर्क है कि जब तक समुदाय मिलकर पहल नहीं करेगा, तब तक सुरक्षित और समावेशी शहर का सपना अधूरा रहेगा।

इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों को ज़्यादा स्वागतयोग्य और सबके लिए सुलभ बनाने की बात भी उठी। रोशनी, सुगम पहुँच और सजग पड़ोस जैसी चीज़ें किसी भी शहर की रातों का चरित्र तय करती हैं, और इन पर नागरिकों की भागीदारी से ही बदलाव संभव है।

आगे का सफ़र

पहली वॉक को मिले उत्साहजनक प्रतिसाद से प्रेरित होकर आयोजकों ने इसे नियमित रूप देने का फ़ैसला किया है। अब हर महीने ऐसी पदयात्राएँ आयोजित होंगी, ताकि नागरिकों को लगातार एक साझा मंच मिलता रहे और यह मुहिम एक बढ़ते हुए समुदाय का रूप ले सके।

जो भी महिला, पुरुष या समर्थक इस सोच से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं, उन्हें आने वाली वॉक में शामिल होने का न्योता दिया गया है। मीडिया संबंधी जानकारी और अगली पदयात्राओं की सूचना के लिए ‘रिक्लेम द नाइट दिल्ली’ से सोशल मीडिया के ज़रिये या सीधे आयोजकों से संपर्क किया जा सकता है।

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